जौनपुर|डॉoशफीक खान एमबीबीएस एम यस वरिष्ठ चिकित्सक सदर अस्पताल जौनपुर अपने गुरु की तबीयत खराब होने की खबर सुन बिना पल गवाये देवदूत बन गुरु की जान बचाने पहुच गये।अपनी योग्यता और अनुभव को चरितार्थ करते हुए मायूस मुहल्ले एवं परिजनों के चेहरे को खुशियों से भर दिया।
महर्षि दयानंद इण्टर कॉलेज मानी कलां,जौनपुर के संस्थापक/प्रबन्धक विन्देश्वरी प्रसाद गुप्त जी का ईलाज हेल्थसिटी हॉस्पिटल वाराणसी से चल रहा था।जिनका रविवार की शाम तबियत तेजी से बिगड़ने लगा,कोविड19 की वजह से ज्यादा तर हॉस्पिटल मरीज़ एडमिट नही कर रहे हैं एवं स्पेशलिस्ट डाक्टर अपने हॉस्पिटल पर नही मिल थे।ना उम्मीद हो चुके परिजन बहुत अजमंजस में घबराने लगें।इसकी सूचना डॉo शफीक खान को मिला,खबर सुनते ही शिष्यधर्म का पालन करते हुए तत्काल ईलाज करने अपने गुरु के घर पहुँच कर सुबह तक उम्मीद से ज्यादा परिणाम देकर अपनी काबिलियत से मुरझाये हुए चेहरे पर खुशियां विखेर दिया।
इस समय ठीक हालात में घर पर ही स्वास्थ्य लाभ लें रहें है।डॉo सारीब एवं डॉo राकिब का सराहनीय योगदान दिया।डॉoशफीक अपनी प्राम्भिक शिक्षा इसी विद्यालय महर्षि दयानंद इण्टर कॉलेज से प्रारम्भ कर एमबीबीएस एमडी करके सदर अस्पताल जौनपुर में सेवायें दे रहें हैं।मानी कलां गाँव में पले बढ़े इस मिट्टी से लगाव रख़ते हुये ड्यूटी से वापस आकर मैक्स हॉस्पिटल मानी कलां में मरीजों को निशुल्क सेवाभाव से परामर्श दे रहे हैं।
इस समय ठीक हालात में घर पर ही स्वास्थ्य लाभ लें रहें है।डॉo सारीब एवं डॉo राकिब का सराहनीय योगदान दिया।डॉoशफीक अपनी प्राम्भिक शिक्षा इसी विद्यालय महर्षि दयानंद इण्टर कॉलेज से प्रारम्भ कर एमबीबीएस एमडी करके सदर अस्पताल जौनपुर में सेवायें दे रहें हैं।मानी कलां गाँव में पले बढ़े इस मिट्टी से लगाव रख़ते हुये ड्यूटी से वापस आकर मैक्स हॉस्पिटल मानी कलां में मरीजों को निशुल्क सेवाभाव से परामर्श दे रहे हैं।




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