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कवि सत्येन्द्र उपाध्याय के द्वारा सुबह पर लिखी गयी नीरवता पूर्ण कविता सोशल मीडिया पर वायरल
सुप्रभात
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हे सुबह ! तेरा यूँ शांत रहना ,
स्वार्थी जग मे चुप एकांत रहना,
हे दुःख पीड़ित मानव के वैद्य,
है तुझमे अनुपम वात निर्वेद।
सूर्य तेरे पलकों पर जगता,
चाँद तेरे आँखो मे रहता।
जग को मैं ना समझ सका ,
गुण अस्तित्व को तेरे जान लिया,
कुण्ठित मन मेरा तनिक हुआ,
खुद का मै तुझमे विलय किया।


रचनाकार-
सत्येन्द्र प्रताप उपाध्याय

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