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अल्फिया खान महमूद आलम
मारूफ पुर खेतासराय जौनपुर
          
             माजूर बेटा

ताहा अपने बाप का एकलौता बेटा था। उसके कोई भाई बहन नहीं थे। जिसकी वजा से मां बाप का प्यार पूरी तरह ताहा पर कुर्बान था। ताहा हाथ पैर से थोड़ा माज़ूर था। उसके अम्मी अब्बू बहुत फिक्र मंद रहते थे। मगर वो उसे कभी एहसास नहीं होने देते। बल्कि वो उसे हौसला देते रहे। जब ताहा थोड़ा बड़ा हुआ तो उन्होंने उसका दाखिला करवा दिया। ताहा बहुत ज़हीन था। वक्त गुजरने के साथ साथ उसके माता पिता ने उसके अच्छे मार्क्स को देखते हुए उसका दाखिला यूनिवर्सिटी में करवा दिए। ताहा को यूनिवर्सिटी में बिलकुल भी अच्छा नहीं लग रहा था। क्यों कि ताहा की माजूरी का उसके क्लास फेलो बहुत मजाक बनाते थे। कुछ दोस्तों ने उसके साथ इस कदर ज्यादती की उसकी माज़ूरी के इतने ताने दिए कि वो यूनिवर्सिटी छोड़ने पर मजबूर हो गया

        अब ताहा खुद से हार चुका था। उसकी हिम्मत जवाब दे चुकी थीं। एक दिन ताहा ना चाहते हुए भी यूनिवर्सिटी छोड़ कर घर चला जाता है। घर में दाखिल होते हुए उसकी निगाह वालिद साहब पर पड़ी। वो अपने पिता को गले लगा कर रोने लगा। पिता ने रोने की वजा पूछी तो ताहा ने सब कुछ सच सच बता दिया। ताहा बेटे की दास्तान सुन कर बाप का दिल बहुत दुखा आंखें दर्द से भर आई। लेकिन उन्होंने हिम्मत ना हारी और ताहा के लिए खुदा से मदद मांगी और उसे खूब हिम्मत दिलाई। उसे दोबारा यूनिवर्सिटी जाने पर मजबूर किया। उसे नसीहत की ताहा बेटे बस तुम पूरी लगन से पढ़ाई करो। और मजाक बनाने वालों का जवाब अपनी कामियाबी से देना।

  ताहा ने दोबारा यूनिवर्सिटी का रुख किया। और अपनी पढ़ाई पूरी लगन से करता रहा। अब तो उसके क्लास फेलो उसके पास भी नहीं बैठते थे। इम्तेहान क़रीब था सब दोस्तों ने ताहा को फेल करवाने की ठानी। उस वक्त ताहा ही जान रहा था कि उस पर क्या गुजर रही है? खुदा खुदा कर के इम्तहान खत्म हुआ।

   कुछ दिनों बाद यूनिवर्सिटी का रिज़ल्ट आया ताहा और उसके क्लास फेलो रिज़ल्ट चेक करने में व्यस्थ थे। माज़ूर ताहा ने जब अपना रिज़ल्ट चेक किया तो उसकी खुशी का ठिकाना न रहा। उसने पूरी यूनिवर्सिटी में टॉप किया था। वहीं पर उसके कुछ दोस्त फेल हो गए थे। और वो आज अपनी नाकामी पर बहुत शर्मिंदा थे। दोसरी तरफ ताहा ने अपने माता पिता का सर फख्र से बुलंद कर दिया था। उसके माता पिता, रिश्ते दारों ने, गांव वालों ने बहुत बहुत शुभकामनाए दी तोहफे तहाएफ दिए।

    अब ताहा का वक्त बदल चुका था। अब उसके पास अपनी खुद की कम्पनी थी। और अब दौलत की कमी न थी। उसकी ज़िंदगी का तमाशा बनाने वाले कुछ दोस्तों के हालात बहुत बुरे हो गए थे। वो दर दर की ठोकरें खा रहे थे। उनके खराब मार्क्स को देखते हुए कंपनिया उन्हें नोकरियां देने से इंकार कर रही थी। एक रोज ताहा किसी शहर से गुजर रहा था। उसे पता चला कि उसके क्लास फेलो रमीज ने ज़िंदगी से तंग आकर जान देने की ठान ली है। वो अचानक से ताहा की कार के सामने कूद पड़ा। माजूर ताहा कार को ब्रेक देते हुए बाहर आया तो देखा वो उसका क्लास फेलो रमीज था। उसने इल्तेजा कि अरे ताहा तुम?? तुमने मुझे बचा क्यों लिया? मुझे मरने क्यों नहीं दिया? अरे रमीज ऐसी क्या बात है कि तुम मरना चाहते हो? अब रमीज ने ताहा को खुद पर बीत जाने वाले बुरे हालात बता दिए।। वहीं ताहा ने रमीज को ज़िंदगी जीने का हौसला दिया। बहुत प्यार से उसका हाथ पकड़ते हुए उसे अपनी कार में बिठाया और उसे अपनी कम्पनी में ले जाकर नौकरी दी। और अब रमीज बहुत शर्मिंदा था उसने ताहा के साथ की हुई ज्यादती की माफ़ी मांगी।
दोस्तों! वक्त सब का बदलता है अच्छे वक्त में अगर आप किसी की मदद नहीं कर सकते तो मजाक भी न बनाएं। क्यों कि सफलता सिर्फ़ मेहनत से मिलती है। सफलता किसी की शक्ल, मजबूरी, गरीबी देख कर कदम नहीं चूमती।

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